हिंदी न्यूज़ – पहले उंगली काटकर मूर्ति पर खून चढ़ाया फिर काट दिया अपना गला

By | February 14, 2019


गुजरात के राजकोट से करीब 30 किलोमीटर दूर एक शिव मंदिर की बड़ी महिमा मानी जाती थी. उस दिन इस मंदिर में रामू भाई जिस तरह पूजा-पाठ कर रहा था, सब उसे गौर से देख रहे थे. एक विशाल यज्ञ और आग की उठती लपटों के साथ ही वहां एक खोपड़ी रखी थी जिसकी पूजा में रामू भाई मगन था. यह पूरा दृश्य किसी को डरावना लग रहा था तो किसी को रोमांचक. अस्ल में इसके बाद के दृश्य ने वहां मौजूद लोगों का दिल दहला दिया जब रामू भाई ने आत्मबलि दी.

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सिर्फ 22 साल का नौजवान रामू भाई राजकोट का रहने वाला था. वह अक्सर इस मंदिर में आकर श्रद्धा भाव से भगवान शंकर की पूजा अर्चना किया करता था. कुछ समय से वह अपने व्यवसाय को लेकर परेशान चल रहा था. इस दौरान उसका मंदिर में पूजा पाठ करने का सिलसिला ज़्यादा हो गया था.

READ: आस्था और अंधविश्वासएक दिन रामू भाई की मुलाकात मंदिर के रास्ते में एक बाबा से हुई. उस बाबा की बातों से प्रभावित होकर रामू भाई रोज़ उसकी संगत में उठने-बैठने लगा. धीरे-धीरे उसके साथी बाबाओं के साथ भी रामू भाई का मेलजोल शुरू हो गया. ये लोग भगवान शंकर की महिमा का बखान सुनाते और कई ऐसे किस्से सुनाते कि जिसमें भक्तों ने कठिन साधना की तो भगवान शंकर के आशीर्वाद से उन्हें बड़ी कामयाबी मिली.

इन्हीं किस्सों से प्रभावित रामू भाई ने उन बाबाओं को एक दिन अपनी परेशानी के बारे में बताया तो नशा किए हुए उन बाबाओं ने अलौकिक अंदाज़ में उसे बलि की कहानियां सुनाईं. इन कहानियों के बाद रामू भाई ने तय किया कि वह भी भगवान महादेव या काल भैरव का आशीर्वाद पाने के लिए बलि देगा. पूजा पाठ की पूरी तैयारी कर चुका था रामू भाई और अब उसे एक खोपड़ी की ज़रूरत थी. बाबाओं के बताए हुए रास्ते से रामू भाई एक श्मशान घाट में गया.

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पूरी रात श्मशान में बिताई और मौका पाकर एक जलती हुई चिता से उसने किसी तरह एक अधजली खोपड़ी हासिल कर ली. उस खोपड़ी को उसने बाबाओं द्वारा बताई गई विधि से पूरा संस्कार किया और उसे अपनी पूजा के लिए बाकी सामग्री के साथ रख लिया. इसके बाद अगले दिन रामू भाई बरियान स्थित उस महिमामंडित शिव मंदिर में पहुंचा. लगातार वहां आने के कारण वहां के पुजारियों और मंदिर के लोग उसे जानते-पहचानते थे इसलिए सबने उसे विशेष पूजा करने के लिए मौन स्वीकृति दे दी थी.

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रामू भाई ने एक विशाल यज्ञ का प्रबंध किया और उस खोपड़ी को वहां स्थापित करते हुए कपाल पूजा शुरू की. ज़ोर-ज़ोर से मंत्रोच्चार करते हुए रामू भाई उस कपाल पूजा में मगन हो चुका था. कुछ ही देर में वहां आने-जाने वाले कुछ लोग ठहरकर उसे देखने लगे थे. इसी बीच, रामू भाई एक चाकू से अपनी एक उंगली काट कर उस यज्ञ की लपटों में फेंक दी और हाथ से बहता हुआ खून उस खोपड़ी पर गिराने लगा.

इस दौरान मंत्रोच्चार पूरी तरह जारी था. अब वहां मौजूद लोगों का कुतूहल भी बढ़ गया था और ये लोग आपस में फुसफुसाकर कुछ हैरानी भरी बातें भी करने लगे थे. अब वह उंगली कटने पर बह रहा अपना खून शिवलिंग पर भी टपकाने लगा था और मंत्रों के बीच ‘हर-हर महादेव’ ज़ोर-ज़ोर से बोल रहा था. कुछ देर बाद उसने अपनी जीभ पर कपूर रखकर जला लिया. कपूर जलने के कारण उसे बेहद तकलीफ हो रही थी लेकिन वह एक हाथ में तलवार और दूसरे हाथ में डमरू लेकर डोल रहा था कि लोगों को लगा कि वह नाच रहा है.

कपूर जलने के कारण उसकी जीभ जल गई थी लेकिन रामू भाई ने अस्पष्ट स्वरों में मंत्रोच्चार जारी रखा. श्मशान से वह राख भी लेकर आया था. अब रामू भाई ने खोपड़ी और शिवलिंग पर वह राख चढ़ाई और उसके बाद चारों तरफ वह राख उड़ाने लगा. यज्ञ की लपटों, धुएं के बीच राख उड़ने से पूरा दृश्य धुंधला हो चुका था. थोड़ी ही देर में वहां गूंज रहे मंत्र इस धुंधलके में शांत हो गए क्योंकि राख उड़ाने के बाद रामू भाई ने ज़ोर से ‘हर-हर महादेव’ का नारा लगाया और तलवार से अपनी गर्दन काट दी.

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रामू भाई को भगवान का आशीर्वाद और दर्शन मिला कि नहीं? वहां मौजूद किसी को तो भगवान के दर्शन नहीं हुए, बस सबको वहां रामू भाई की सिर कटी लाश दिखाई दी. थोड़ी देर बाद किसी ने सूचना दी तो वहां पुलिस पहुंची और पूरा किस्सा सुनकर वह इस बात पर भी हैरान थी कि वहां कई लोग यह सब देखते रहे लेकिन किसी ने रामू भाई को रोका नहीं.

थम नहीं रहीं अंधविश्वासों की कहानियां
दिल्ली के बुराड़ी में एक परिवार के 11 लोगों द्वारा कथित रूप से सामूहिक आत्महत्या के मामले में अब तक सामने आई जानकारी के अनुसार माना जा रहा है कि ये मौतें भगवान और मोक्ष से जुड़े विश्वासों के कारण हुई हैं. देश में इस तरह के अंधविश्वासों से जुड़ी कहानियां लगातार सामने आती रही हैं और यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है.

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गुजरात के रामू भाई की कहानी की तरह कुछ समय पहले ही एक और कहानी आई थी. दिल्ली के मंडकाफ रोड स्थित एक मन्दिर में कृष्ण-जन्माष्टमी के मौके पर भजन-कीर्तन चल रहा था. इसी दौरान अचानक एक आदमी खून से लथपथ मन्दिर में आया और देव प्रतिमा के सामने गिर पड़ा. भजनों और घण्टियों की आवाज़ों के बीच वह पड़ा-पड़ा दोहराता रहा – ‘हां, मैंने ही यह किया.’ कुछ देर बाद उसे अस्पताल में ले जाया गया और मामले की सूचना पुलिस को दी गई.

पुलिस ने मन्दिर के बाहर चबूतरे पर खून से सना एक चाकू बरामद किया. घायल की जेब से एक पत्र मिला जिसमें लिखा था कि वह अपनी बलि स्वेच्छा से देना चाहता है. इस आदमी पर आत्म-हत्या का केस दर्ज कर लिया गया था.

बलि की कुछ और कहानियां
रंगून में एक शाम नमाज़ के वक्त 39 वर्षीय आएशा बी अपनी ढाई साल की लड़की के साथ मस्जिद गई थी. ज़ाहिर है कि वहां कई लोग थे और कई तरह की आवाज़ें थीं. इसी भीड़ और आवाज़ों के बीच मौका देखकर आएशा ने एक चाकू निकाला और बच्ची का गला काट दिया. उस बच्ची की चीखें नमाज़ की आवाज़ों के बीच दब गई औ उस पर किसी का ध्यान ही नहीं गया. इसी बीच, जब आएशा की बहन मरालन बी ने उस मस्जिद में आकर सबको इस बारे में बताया. अस्ल में, मरालन को तब शक हुआ था जब आएशा अपनी बच्ची के साथ मस्जिद जा रही थी इसलिए वह आएशा का पीछा करती हुई कुछ देर बाद मस्जिद पहुंची थी. और वहां पहुंचने में उसे देर हो चुकी थी क्योंकि आएशा अपने धार्मिक अंधविश्वास के चलते बच्ची को कुर्बान कर चुकी थी.

ग्वालियर में पूरन को धार्मिक अंधविश्वास से ग्रस्त कुछ लोगों ने यह विश्वास दिलाया कि अगर भगवान की प्रतिमा के सामने गला काट लिया जाए तो भगवान साक्षात प्रकट होते हैं और फिर वरदान देते हैं. पूरन को न तो यह पता था कि ये लोग ढोंगी हैं और न ही उसने ऐसी कहानियों पर किसी तर्क से काम लिया.

माधवगंज बस्ती का रहने वाला पूरन स्थानीय फालके बाजार स्थित एक मन्दिर में भगवान की प्रतिमा के सामने पहुंचा. भगवान को प्रणाम करने के बाद उसने तेज़ धार वाले एक चाकू से अपना गला रेत दिया. पूरन को विश्वास था कि भगवान प्रकट होकर वरदान मांगने को कहेंगे लेकिन कुछ ही पलों में तड़पने के बाद वह मर गया.

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