182 सीटों में से सिर्फ 2 दर्जन चिह्नित सीटों पर भी ‘आप’ को नोटा से अधिक वोट नहीं मिल पाए

दिल्ली : गुजरात में मिली करारी शिकस्त के बाद आम आदमी पार्टी (आप) का नेतृत्व हार की वजहों को तलाशने में जुटा है। ऐसे में, गुजरात हार की जिम्मेदारी किसके सिर आएगी? राज्य का प्रभार संभाल रहे गोपाल राय की मुश्किल बढ़ सकती हैं। 182 सीटों में से सिर्फ 2 दर्जन चिह्नित सीटों पर भी ‘आप’ को नोटा से अधिक वोट नहीं मिल पाए। इसके पीछे चुनावी रणनीति और प्रभारी की भारी चूक मानी जा रही है। पार्टी के अंदरूनी नेताओं में बहस तेज हो गई है कि किस आधार पर गुजरात में चुनाव लड़ा गया। चुनाव परिणाम के बाद कोई भी नेता खुलकर कुछ नहीं बोल रहा है। हालांकि, संजय सिंह ने पुरानी लाइन लेते हुए इतना जरूर कहा कि ईवीएम की वजह से हार हुई है। डोर-टू-डोर अभियान चलाकर भाजपा और कांग्रेस के विकल्प के तौर पर खुद को पेश करने वाली आम आदमी पार्टी का एक भी उम्मीदवार रुझानों में टॉप-10 में भी नहीं आ पाया है। ‘आप’ रणनीतिकारों का मानना है कि गुजरात हार का असर अन्य राज्यों में पार्टी के विस्तार पर बुरा प्रभाव डालेगा। झारखंड, मध्य प्रदेश, नागालैंड और दक्षिणी के राज्यों में ‘आप’ ने संगठन बढ़ाने की कवायद शुरू कर दी थी। खुद अरविंद केजरीवाल भी अन्य राज्यों में पार्टी को बढ़ाने के प्रति गंभीर रहे हैं। माना जा रहा है कि हार की जिम्मेदारी गोपाल को लेनी होगी। उन्हें अपना प्रभारी पद छोडऩा पड़ सकता है। इससे पहले पंजाब में ‘आप’ को उम्मीद के मुताबिक वोट नहीं दिला पाने की वजह से प्रभारी रहे संजय सिंह को अपना पद छोडऩा पड़ा है। हालांकि, संजय अभी उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रभारी जरूर हैं।

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