लोगों ने परमिंदर अौर उनके बेटे को नए साल की दी बधाई

करनाल: जहां पूरा देश अौर दुनिया देर रात नए वर्ष के आगमन की खुशी में डूबा हुआ था। हर कोई अपने परिवार अौर दोस्तों संग बड़े-बड़े होटलों में नाच-गाकर अौर खा-पीकर नए साल का जश्न मना रहे थे। वहीं करनाल के परमिंदर पाल नए साल के आगमन की खुशियां उन लोगों के साथ सांझा कर रहे थे जो आज भी गरीबी के चलते इस कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर हैं। पिछले कई वर्षों से परमिंदर अौर उनके बच्चे इस प्रकार से नए वर्ष की रात करनाल की सड़कों पर निकल कर गर्म चाय, ब्रेड अौर कंबल उन लोगों को देते हैं जिन्हें इस कड़ाके की ठंड में इसकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है। गरीबी के चलते घर बार न होने की वजह से यह लोग सर्दी में खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर हैं।परमिंदर का कहना है कि वे अपने गुरुअों के दिखाए हुए रास्ते पर चलने की कोशिश करते हैं। जिस प्रकार श्री गुरु नानक देव जी ने 20 रुपए से लंगर सेवा की शुरुवात की थी जो आज बढ़ते बढ़ते करोड़ों रुपए तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि हर कोई नए साल को ढोल धमाकों से मनाते हैं लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं जो सिर्फ नए साल ही नहीं बल्कि हर रोज भूखे पेट कड़ाके की ठंड में बिना कंबल के खुले आसमान के नीचे सोते हैं। जिनके बारे में शायद ही कुछ लोग सोचते हैं। उन्होंने लोगों को संदेश देते हुए कहा कि हमें कुछ समय समाज के लिए निकालना चाहिए।

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