रोटी के लिए घर छोड़ा था और अब जिंदगी ही रूठ गई






शनिवार सुबह को गांव वल्ला से ओठियां को जाती नहर के साथ बनी कच्ची सड़क से एक ट्राली ट्रैक्टर और कंस्ट्रक्शन मशीन नहर में गिर गई, जिसमें पांच प्रवासी नौजवानों रामप्रसाद, शिव प्रसाद, अर्जुन, इंद्र लाल और राम केवल की मौत हो गई। इन पांचों में से सुबह मात्र तीन की ही पहचान हो पाई। 3 मजदूरों की लाशें दोपहर तक लावारिसों की तरह अस्पताल में पड़ी रहीं।

सभी मजदूर यूपी व छत्तीसगढ़ से यहां पैसे कमाने व परिवार को रोजी रोटी दिलाने के लिए आए थे। हर छह महीने के बाद यह सभी अपने परिवार में वापस पैसे लेकर जाते। परिवार भी इनका इंतजार करता कि यह उनके लिए कमा कर लाएंगे, लेकिन शनिवार को जब यह हादसा हुआ तो इनकी लाशें लावारिसों की तरह पड़ी रहीं। दरअसल, सीमेक्स कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों को भी इनके नाम ही पता था। किसी को इनके परिवारों का नहीं पता था, क्योंकि सभी यहां पैसे कमाने आए थे और सभी काम करके वहीं कंपनी में सो जाते थे।

बाल-बाल बचे ड्राइवर और सुपरवाइजर

ट्राली से मौके पर छलांग लगाने के कारण ड्राइवर रिंकू और सुपरवाइजर गगनदीप बाल-बाल बच गए।

लाशों का अभी संस्कार नहीं हो सकता : दाेपहर के समय चंडीगढ़ से कंपनी का ठेकेदार मौके पर पहुंचा। इसके बाद इनकी शिनाख्त हो सकी। पुलिस तब तक इनका पोस्टमार्टम नहीं करवा सकती, जब तक इनके पारिवारिक सदस्य यहां नहीं पहुंच जाते। पोस्टमार्टम के बाद ही लाशों का दाह संस्कार हो पाएगा।

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