राजपूत समाज की कुछ महिलाएं कलेक्टोरेट पहुंचीं और कलेक्टर से इच्छामृत्यु की मांग की

इंदौर –  सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी फिल्म पद्मावत का विरोध कम होने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार दोपहर राजपूत समाज की कुछ महिलाएं कलेक्टोरेट पहुंचीं और कलेक्टर से इच्छामृत्यु की मांग की। उनका कहना था कि या तो आप फिल्म की रिलीज रुकवाएं या फिर हमें मरने की अनुमति दें। महिलाओं ने राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा। हिंदुस्तान के इतिहास में गौरवशाली स्थान रखने वाली मां पद्मावती, जिन्होंने अस्तित्व की रक्षा के लिए 16 हजार नारियों के साथ जौहर किया, जिनके साथ आज हमारी आस्था जुड़ी है, लेकिन फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली  ने सती पद्मावती पर इतिहास को तोड़ मरोड़कर उनके चित्रण को गलत ढंग से पेश करते हुए फिल्म का निर्माण किया। हमने भंसाली से मिलकर कई बार फिल्म नहीं बनाने का आग्रह किया। कई बार ज्ञापन भेजकर फिल्म रुकवाने को कोशिश की, लेकिन फिल्म का निर्माण जारी रहा। सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद फिल्म 25 जनवरी को रिलीज हो रही है। ऐसे में हम महिलाओं की भावनाओं को अंतर्मन तक ठेस पहुंची है। यह हमारी आस्था और संस्कृति पर चोट है। अत: राष्ट्रपति महोदय से निवेदन है कि हमारी जीवन जीने की इच्छा भी लगभग समाप्त हो गई है। हम महिलाएं आपसे इस फिल्म को रुकवाने का आग्रह करती हैं अन्यथा हमें इच्छा मृत्यु की अनुमति प्रदानकर स्वेच्छा से देह त्याग की अनुमति प्रदान करें।

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