पंजाब कैबिनेट पर बागावती सुर,मैट्रिक पास हैं उच्च शिक्षा मंत्री

आखिरकार कई माह की उथल-पुथल के बाद पंजाब में कैप्टन सरकार का कैबिनेट विस्तार हो चुका है। पर मंत्रिमंडल का गठन का होने के बाद से ही सरकार के खिलाफ विरोध के सुर उठने लगे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण कैप्टन द्वारा अपने चेहतों को महत्वपूर्ण विभाग सौंपना है।

मंत्रियों को उनकी योगयता के अनुसार नहीं बल्कि वरिष्ठता के आधार पर मंत्रालय दिए गए। कैबिनेट में उच्च शिक्षा मंत्री बनाई गई रजिया सुल्ताना 10 वीं जबकि शिक्षा मंत्री चुने गए ओ.पी. सोनी 12 वीं पास है। इससे पहले यह दोनों विभाग दीनानगर से विधायक अरूणा चौधरी संभालती थी। पी.डब्लयूडी तथा समाजिक सुरक्षा विभाग मलेरकोटला से विधायिका रजिया सुल्ताना के पास था। कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने अपने कुछ वफादारों को उनकी ईमानदारी का इनाम दिया है। वहीं कई मंत्री मनचाहा मंत्रालय न मिलने से दुखी है।

गौरतलब है कि शनिवार को शपथ ग्रहण समारोह के दौरान मीडिया के साथ बातचीत करते समय मुख्यमंत्री ने कहा था कि कैबिनेट मंत्रियों की विशिष्ठता को ध्यान में रखकर मंत्रालय आंवटित किए गए है। वहीं इस संबंधी वरिष्ठ कांग्रेसी सलाहाकार ने कहा कि मंत्री पद आंवटन के समय वरिष्ठता और अनुभव को ध्यान में रखा गया है। सोनी के लंबे राजनीतिक करियर तथा रजिया ने एक वर्ष से अधिक राज्यमंत्री के रूप में कार्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें शिक्षा मंत्रालय सौंपा गया है। वहीं प्रताप सिंह बाजवा को पंजाब कांग्रेस का प्रधान बनाने के बाद कैप्टन के साथ खड़े माझा के तृप्त राजिंदर बाजवा , सुखबिंदर सिंह सरकारिया, सुखजिंदर रणधावा और मालवा के गुरप्रीत कंगार को उनकी वाफादारी का इनाम मिला है।

वहीं खन्ना से विधायक गुरकीरत सिंह कोटली तथा पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह ने रोष जताते कहा कि वह मंत्री बनने के सारे मापदंड़ो को पूरा करते थे लेकिन उनके नजर अंदाज कर दिया गया। उनकी जगह एक जूनियर विधायक को मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया गया। वहीं मंत्रिमंडल विस्तार के बाद गिद्दडबाहा के कांग्रेस वर्करों में काफी रोष है। उन्होंने कैबिनेट में विधायक अमरिंदर सिंह राजा वंडिग को शामिल न करने पर पार्टी के खिलाफ सोशलमीडिया पर नाराजगी व्यक्त की है।