ढाई हजार से अधिक स्क्रीन्स में रिलीज़ हो रही अक्षय कुमार की पैड मैन

मुंबई –  हिंदी सिनेमा के बॉक्स ऑफ़िस पर इस हफ़्ते फिल्म पैड मैन रिलीज़ होगी। एक पगले सुपरहीरो की कहानी। ये सुपरहीरो ‘सोच’ का नायक है। सोच, उस विषय की, जिसके बारे में लोग बात करने से भी कतराते हैं, फिल्म बनाना तो दूर की बात। पर ये अक्षय कुमार हैं। न जाले बुने और न ही पतलून के ऊपर लाल चड्डी पहन कर धरती को बचाने का सुपरहीरोइज़्म दिखाया। आर बाल्की के निर्देशन में बनी फिल्म पैड मैन, महिलाओं की माहवारी के दौरान होने वाली उस तकलीफ़ के ख़िलाफ़ एक मुहिम, जहां जुबां सिर्फ़ शर्म के मारे ख़ामोश हो जाती है। ये फिल्म सेनेटरी नैपकिंस के क्षेत्र में क्रांतिकारी आविष्कार करने वाले उस अरुणाचलम मुरुगनाथम की ज़िंदगी से जुड़ी है, जिन्होंने हाइजनिक और सस्ते नैपकिन बनाने वाली मशीन बनाई और फिर उसे लोगों तक पहुंचाने के लिए पसीना भी बहाया। साल 2014 तक जब तक टाइम मैगजीन ने अरुणाचलम को दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में शामिल नहीं किया था, इस असली पैड मैन को बहुत ही कम लोग जानते थे।

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