जालंधर ने दिए 3 मुख्यमंत्री अब एक मंत्री पद को तरसा

कांग्रेस के इतिहास में पहली बार ऐसी स्थिति बनी है कि पंजाब को 3 मुख्यमंत्री और अनेक दिग्गज राजनीतिज्ञ देना वाला जिला केवल एक मंत्री पद को तरस गया है। इससे पूर्व स्व. दरबारा सिंह, स्व. कामरेड राम किशन व स्व. बेअंत सिंह जैसे कांग्रेस के कद्दावर नेताओं ने जहां प्रदेश भर में अपनी खासी धाक जमाए रखी, वहीं राज्य के मुख्यमंत्री भी बने।

पहली बार चुने विधायक की शर्त ने फेरा इनकी उम्मीदों पर पानी
पिछले एक साल से पंजाब मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर बनी ऊहापोह की स्थिति आज शांत हो गई और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने ऑल इंडिया कांग्रेस के प्रधान राहुल गांधी से सहमति हासिल करने के उपरांत 9 कैबिनेट मंत्रियों की सूची जारी कर दी है परंतु इस सूची से जालंधर जिले से संबंधित किसी विधायक का नाम न शामिल होने से कांग्रेस कार्यकत्र्ताओं में खासी मायूसी छा गई है, परंतु 18 अप्रैल को दिल्ली में कै. अमरेन्द्र की प्रदेश कांग्रेस प्रभारी आशा कुमारी, सह-प्रभारी हरीश चौधरी व पंजाब प्रदेश कांग्रेस के प्रधान सुनील जाखड़ के मध्य हुई मीटिंग के दौरान फाइनल हुआ कि पहली बार विजयी विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया जाएगा।

इस निर्धारित हुई शर्त से जहां दलित विधायक सुशील रिंकू, हिंदू समुदाय से सबंधित विधायक राजिन्द्र बेरी, जट सिख विधायक जूनियर अवतार हैनरी व दलित विधायक चौधरी सुरिन्द्र सिंह की उम्मीदों पर पानी फिर गया। वहीं, निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के करीबी विधायक परगट सिंह का नाम खासा उभरकर सामने आया। परगट सिंह दूसरी बार विधायक बने थे। विधायक परगट का नाम संभावित खेल मंत्री के तौर पर भी उभर कर सामने आया और पार्टी हाईकमान द्वारा बनी अंतिम विधायकों की सूची में भी उनका नाम शामिल था परंतु अंतिम समय के दौरान उनके नाम पर भी सर्वसम्मति न बनने के कारण विधायक परगट सिंह का पत्ता भी कट गया।