जालंधर के जन औषधि केंद्र में 1 भी दवा मौजूद नहीं

पंजाब सरकार की तरफ से बार-बार डाक्टरों को निर्देश जारी कर कहा जाता है कि मरीजों को वही दवाइयां लिखकर दी जाएं जो अस्पताल और जन औषधि केंद्रों में मौजूद हों लेकिन आलम यह है कि प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के तहत सिविल अस्पताल जालंधर में स्थित जन औषधि केंद्र में पिछले 6 महीने से दवाइयां ही नहीं आईं, जोथोड़ी-बहुत दवाइयां पड़ी हैं वे भी एक्सपायर होने वाली हैं।

परियोजना के तहत इन केंद्रों से मधुमेह, हार्ट और कैंसर जैसी 16 गंभीर बीमारियों के लिए 700 प्रकार की दवाइयां दिए जाने का दावा किया जाता है लेकिन इस केंद्र में दवाइयां मौजूद नहीं होने का कारण पूछने पर पता चला कि पिछले कई महीनों से कंपनियों ने दवाइयों की सप्लाई बंद कर रखी है। इसका कारण यह है कि कंपनियों को दवाइयों के बिल अदा नहीं किए गए हैं। यही नहीं, इस केंद्र के कर्मचारियों को भी 6 महीने से वेतन तक नहीं मिला है। वहीं सिविल अस्पताल की फार्मेसी से डाक्टरों की तरफ से लिखी गई दवाइयां भी मरीजों को पूरी नहीं दी जाती हैं। अस्पताल की फार्मेसी के बाहर मौजूद मरीजों ने बताया कि डाक्टरों की तरफ से 5 दवाइयां लिखी जाती हैं तो फार्मेसी से 3-4 ही मिलती हैं।

मरीज न झगड़ें इसलिए दवाइयों का बोर्ड ही उतार दिया
सरकार की तरफ से मरीजों को 251 प्रकार की दवाइयां मुफ्त में दी जाती हैं। बाकायदा सिविल अस्पताल की फार्मेसी से मरीजों को जो दवाइयां मुफ्त में दी जाती हैं उनके बारे में सिविल अस्पतालों में बोर्ड लगाए गए थे और इन पर हरेक दवाई का नाम लिखा गया था लेकिन पूर्व सरकार के समय से दवाइयों बारे सिविल अस्पताल में लगा बोर्ड अब उतार दिया गया है। यह पूछे जाने पर कि बोर्ड क्यों उतारा गया है तो डाक्टर बावा ने बताया कि कभी-कभार पीछे से दवाइयों की कमी होने पर मरीज झगड़ते हैं कि बोर्ड पर तो यह लिखा गया है कि यह दवाई अस्पताल से मुफ्त में दी जाएगी इसलिए यह बोर्ड उतार दिया गया है।

जन औषधि केंद्रों से सिविल अस्पताल को सप्लाई हुई हैं दवाइयां
जन औषधि केंद्र के कर्मचारी से केंद्र में दवाइयां मौजूद नहीं होने बारे पूछने पर उन्होंने बताया कि 6 महीने से दवाइयों की सप्लाई नहीं आ रही है। इस जन औषधि केंद्र से सिविल अस्पताल और दूसरे पी.एच.सी. सैंटरों को दवाइयां सप्लाई की जाती हैं। पी.एच.सी. सैंटरों को सप्लाई दवाइयों के बिलों की अदायगी में कोई समस्या नहीं आई लेकिन जो दवाइयां सिविल अस्पताल को सप्लाई हुई हैं उनके बिलों की अदायगी कई महीनों से रुकी हुई है। इस कारण दवा कंपनियों ने सप्लाई रोक दी है।